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Rajat Sharma's Blog | संसद में संवाद जरूरी है, हिट एंड रन नहीं

 Written By: Rajat Sharma
 Published : Aug 12, 2026 05:11 pm IST,  Updated : Aug 12, 2026 05:11 pm IST

विपक्ष की हठधर्मिता के कारण मॉनसून सेशन वॉशआउट होने जा रहा है, क्योंकि विपक्ष सरकार की बात सुनने को तैयार नहीं है। मुझे नहीं लगता कि राहुल गांधी का मकसद जंतर मंतर पर पुलिस एक्शन के मुद्दे पर अमित शाह से जवाब तलब करना है।

Rajat Sharma- India TV Hindi
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा Image Source : INDIA TV

संसद में गतिरोध लगातार जारी है। अब मॉनसून सत्र के समापन के लिए सिर्फ एक दिन रह गया है। लोकसभा ने आज हंगामे और नारेबाजी के बीच FCRA (Foreign Contribution Regulatory Act) संशोधन बिल को JPC के पास भेज दिया।

आज गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर को पत्र भेजकर कहा कि वह जंतर मंतर पुलिस एक्शन पर लम्बी बहस के लिए और एक-एक सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे ठुकराते हुए कहा कि हमें गृह मंत्री का भाषण सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है।

गतिरोध जारी है, लोक सभा के अंदर विरोधी दलों के सांसद पोस्टर लेकर नारे लगाते रहे और सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई। साफ है, विपक्ष की हठधर्मिता के कारण मॉनसून सेशन वॉशआउट होने जा रहा है, क्योंकि  विपक्ष  सरकार की बात सुनने को तैयार नहीं है।

मुझे नहीं लगता कि राहुल गांधी का मकसद जंतर मंतर पर पुलिस एक्शन के मुद्दे पर अमित शाह से जवाब तलब करना है। राहुल गांधी का उद्देश्य तो किसी तरह अमित शाह को नीचा दिखाना है, दुनिया को ये दिखाना है कि न मोदी ताकतवर हैं, न अमित शाह, राहुल किसी का भी अपमान कर सकते हैं, तू-तड़ाक कर सकते हैं।

राहुल दिखाना चाहते हैं ये कह कर कि “वो गए, वो भाग गए, वो सामना नहीं कर सकते।” ऐसी-ऐसी बातें कहना, बार बार कहना, लेकिन जब आमने-सामने मुकाबला होता है तो राहुल सुनने को तैयार नहीं होते। 

राहुल सवाल पूछें, आरोप लगाएं, फिर कहें कि हम अमित शाह का भाषण सुनना नहीं चाहते। संसद की एक परंपरा है, संवाद की। संसद की विरासत है तर्क की, वाद-विवाद की। नेता विपक्ष का पद एक जिम्मेदारी का पद है। उन्हें समझना होगा, संसद में हिट एंड रन नहीं हो सकता, संसद को सड़क नहीं बनाया जा सकता।

अब अडानी के विरोधी किस बात का रोना रोयेंगे?

अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ सारे मामलों को हमेशा के लिए बंद कर दिया। न्यूयॉर्क की ब्रूकलिन कोर्ट ने अडानी के खिलाफ सभी आपराधिक आरोपों को खारिज कर दिया।

अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने माना था कि अडानी के खिलाफ धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों को साबित करने के लिए कोई छोटा मोटा सबूत भी नहीं है, इसलिए अडानी के खिलाफ केस चलाने का कोई मतलब नहीं बनता।

कोर्ट ने गौतम अडानी से लिखित हलफनामा लिया जिसमें उन्होंने कहा है कि केस खत्म करने के लिए कोई सौदा नहीं हुआ। 2024 में अडानी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारत सरकार के अधिकारियों को रिश्वत देने की पेशकश की थी ताकि अडानी ग्रुप की एक कंपनी को सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की मंजूरी मिल सके। अडानी ग्रुप पर अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का भी आरोप लगा था। गौतम अडानी ने हर बार आरोपों को गलत बताया।

अमेरिकी एजेंसियों ने जांच की, कोई ठोस सबूत नहीं मिले। कोर्ट के फैसले का गौतम अडानी  ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल दौर में भी उन्हें पूरा यकीन था कि सच की जीत होगी, आज ईमानदारी की जीत हुई।

ये बड़ी बात नहीं है कि अमेरिका की कोर्ट ने अडानी को क्लीन चिट दे दी। बड़ी बात ये है कि अमेरिका की कोर्ट ने कहा कि अडानी के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक छोटा सा सबूत भी नहीं मिला। अमेरिका में जब तक केस चलता रहा, काफी टेंशन थी, पर अडानी ने अपने बिजनेस प्लान को नहीं रोका।

पिछले साल अडानी ने इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, पोर्ट, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया। अब समस्या उन लोगों को होगी जो हर रोज अडानी का नाम लेकर, अडानी की फोटो लगाकर आरोप लगाते रहे।

क्या वो अमेरिका की कोर्ट पर सवाल उठाएंगे? अब वो अडानी पर इल्जाम कैसे लगाएंगे?

वंदे मातरम्: हर भारतीय के लिए जरूरी है

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वंदे मातरम बिल पर दस्तखत कर दिए। अब देश के हर नागरिक को राष्ट्रगीत वंदे मातरम का उसी तरह सम्मान करना होगा, जैसे राष्ट्रगान जन गण मन का करना होता है। सभी सरकारी कार्यक्रमों में जन-गण-मन के साथ साथ वंदे मारतम् का भी गायन होगा।

15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से भी वंदे मातरम् गाया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस की थीम इस बार वंदे मातरम् रखी गई है। वंदेमातरम् को लेकर सबसे ज्यादा राजनीति महाराष्ट्र में हो रही है। कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि सरकार मुसलमानों को परेशान करने के लिए जबरन वंदे मातरम् को थोपना चाहती है, इसके पीछे देशप्रेम नहीं, बीजेपी का धार्मिक एजेंडा है।

वंदे मातरम् आजादी की लड़ाई का तराना है। इस गीत के 150 साल पूरे होने पर लाल किले की प्राचीर से इसका गायन भी न्यायोचित है। इस मामले को हिंदू-मुसलमान की नजर से देखना गलत है। यह भावना देशभक्ति से जुड़ी है लेकिन भविष्य के लिए एक प्रैक्टिकल प्रॉब्लम होगी। किसी भी सरकारी समारोह में वंदे मातरम्, जन-गण-मन और राज्य का गीत गाना अनिवार्य होगा, तो इसमें कम से कम 6-7 मिनट लगेंगे। ये कितना व्यावहारिक होगा, इस पर विचार करना चाहिए और इसके लिए कोई रास्ता निकालना पड़ेगा।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 11 अगस्त, 2026 का पूरा एपिसोड

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